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पुखराज (पीला नीलम): कौन पहने और कैसे

पंडित गिरीश चंद्र पर्गाईं द्वाराअपडेट 3 सितंबर 20256 मिनट

पीला नीलम, यानी पुखराज, गुरु (बृहस्पति) का रत्न है, जो वैदिक ज्योतिष का सबसे शुभ ग्रह है। यह उनके लिए सर्वोत्तम है जिनकी कुंडली में गुरु शुभ पर कमजोर हो, विशेषकर धनु और मीन लग्न के लिए। यह ज्ञान, धन, समय पर विवाह और स्पष्ट निर्णय को सहारा देता है। उचित परामर्श के बाद, गुरुवार की सुबह दाहिने हाथ की तर्जनी में सोने में जड़वाकर धारण करने पर यह भाग्य और उन्नति के द्वार खोलता है।

पीला नीलम, जिसे हिंदी में पुखराज कहते हैं, गुरु (बृहस्पति) का रत्न है, जो वैदिक ज्योतिष का सबसे शुभ ग्रह है। गुरु ज्ञान, भाग्य, विवाह, संतान और आध्यात्मिक उन्नति का कारक है। इसी कारण पुखराज सबसे अधिक अनुशंसित और विश्वसनीय रत्नों में से एक है, विशेषकर समृद्धि, ज्ञान और समय पर विवाह चाहने वालों के लिए।

यह सुनहरा-पीला रत्न गुरु के शुभ प्रभाव को बढ़ाता है। जिन्हें विवाह में देरी, आर्थिक अस्थिरता या निर्णय लेने में कमजोरी का अनुभव होता है, उन्हें इसे विचार में लेने की सलाह दी जाती है। विद्यार्थियों को एकाग्रता और स्मरणशक्ति में लाभ मिलता है।

पुखराज किसे पहनना चाहिए?

पुखराज उनके लिए सर्वाधिक उपयुक्त है जिनकी कुंडली में गुरु शुभ भावों का स्वामी हो, विशेषकर धनु और मीन लग्न के लिए। फिर भी इसे केवल सुनी-सुनाई बात पर न पहनें। किसी सच्चे ज्योतिषी से पुष्टि अवश्य कराएँ, क्योंकि गलत स्थिति वाले गुरु को बल देना उल्टा प्रभाव डाल सकता है।

पुखराज को शुद्ध रूप से कैसे धारण करें?

आदर्श वजन सामान्यतः 5 से 7 कैरेट होता है, जिसे सोने में जड़वाया जाता है क्योंकि सोना गुरु से मेल खाता है। इसे दाहिने हाथ की तर्जनी अंगुली में पहना जाता है। गुरुवार की सुबह, शुक्ल पक्ष में पहनना श्रेष्ठ है।

पहनने से पूर्व अंगूठी को कच्चे दूध, गंगाजल या शहद में डुबोकर शुद्ध करें और "ॐ ब्रीं बृहस्पतये नमः" मंत्र का 108 बार जाप कर ऊर्जान्वित करें। असली पुखराज पारदर्शी, समान रंग का और दरार रहित होता है। सही समय पर ठीक से धारण किया गया पुखराज आने वाले महीनों में अवसर, वैवाहिक सुख और मानसिक स्पष्टता के द्वार खोल सकता है।

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